Database Schema in Hindi
Database schema, Database के Structure को Define करता है
इसमें Data, Tables में संग्रहित किए जाते हैं। प्रत्येक Table का एक नाम होता है तथा उसके Columns में विभिन्न सूचनाओं को रखा जाता है।
उदाहरण के लिए एक Student नामक Table, Student की विस्तृत जानकारी Store के लिए विभिन्न Columns जैसे ID, Name, DOB, Address , Phone number आदि रखता है।
वास्तव में Schema, एक Database बनाने के लिए एक Blueprint के समान है जो यह बताता है कि Tables में Data कैसे व्यवस्थित किया जाता है,
प्रत्येक Table, किस प्रकार की सूचनाओं को रखता है और Tables एक दूसरे से कैसे जुड़े हैं।
Schema, नियमों को भी शामिल करता है ताकि Data सटीक और एक समान हो।
Database में Schema क्यों महत्त्वपूर्ण है
एक Database schema महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह Data को सरल और व्यवस्थित तरीके से तरीके से रखने मे मदद करता है।
Data schema आपको Data के बारे में यह दिखाता है कि Data कैसे Store किए गए हैं, Data के विभिन्न टुकड़े कैसे आपस में जुड़े है, तथा Data को Accurate रखने के लिए क्या Rules लागू किया गया है।
जब आपके Database का Schema अच्छा रहता है तब यह Data को संग्रहित, उपयोग करना, और ढूंढना आसान बनाता है।
Schema आपको Rules लागू करने के द्वारा होने वाली गलतियों जैसे यह सुनिश्चित करना कि महत्त्वपूर्ण Data Null(Blank) नहीं होना चाहिए, दो Records समान नही होना चाहिए आदि को रोकता है।
इससे Data विश्वसनीय और भरोसेमंद रहता है। जब Schema बहुत अच्छे से संगठित रहता है तब Database के कार्य भी तेजी से होते है।
जब Data को एक Logical तरीके से व्यवस्थित किया जाता है तब Data को तेजी से खोजा तथा प्राप्त किया जा सकता हैे यह विशेषकर उस समय ज्यादा महत्वपूर्ण होता है जब Database की Size बढ़ती जाती है और यह सुनिश्चित करना होता है कि Database लगातार सुचारू रूप से चलता रहे।
Schema, या अनुमति देते हुए आपकी Data को सुरक्षित रखता है कि Database के विभिन्न भागों को कौन Access कर सकता है और कौन नहीं कर सकता, जिस संवेदनशील जानकारियां सुरक्षित रहती है।
Components of Database schema in Hindi
Schema निम्न Components से मिलकर बने होते है
1) Tables:
यह Data की Structure को define करता है इसमे columns, data types, और relationships होते है
2) Columns:
यह Table के भीतर Data के Fields या Attribute को बताता है जैसे Name, DOB, Course, Fees आदि।
3) Data Types:
प्रत्येक Column में Store किए जा रहे Data के types को बताता है। इन Data types में integer, string, double, char या date आदि हो सकतें है।
4) Relationships:
यह दो या दो से अधिक Tables के बीच में Connection या Relationship को define करता है ये Relation one-to-one, one-to-many, या many-to-many हो सकतें है।
5) Indexes:
Index आपको बड़ी तेजी से Database से Data प्राप्त करने देता है ये एक Book के Index के समान कार्य करता है जो आपको पूरे Tables में अपने Data को ढूंढने के बजाय, तेजी से उस Data तक पहुंचाता है
6) Constraints:
Constraints, Table के Columns में लागू किए जानें वाले Rules है को Data को Accurate और Reliable बनाए रखने में मदद करता है।
Types of Database Schema in Hindi
Database Schema के निम्न प्रकार है।
1) Physical Database Schema
2) Logical Database Schema
3) View Database Schema
Physical Database Schema
एक Physical Database Schema, Database का एक भाग है जो यह बताता है कि Data, वास्तव में Physical storage devices जैसे Harddisk, SSD आदि में कैसे संग्रहित किया गया है।
यह Schema यह जानकारी देता है कि Data का types क्या है, Data files में कैसे सुरक्षित है, ये files कैसे व्यवस्थित है और कैसे Indexes का उपयोग, Data को जल्दी से प्राप्त करने में किया जाता है।
यह Computer hardware तथा Database system की जरुरत का भी ध्यान रखता है ताकि सबकुछ अच्छे से सुचारू रूप से चले कार्य करे।
Physical schema का मुख्य उद्देश्य यह रहता है कि Database कुशलता पूर्वक से कार्य करें तथा Storage space का अच्छे से उपयोग किया जा सके।
यह Schema यह सुनिश्चित करता है कि Data को प्राप्त करना सुरक्षित करना और ढूंढना जैसे कार्य को बड़ी कुशलता पूर्वक किया जा सके ताकि Database system को अच्छे से कार्य करने में मदद मिल सके।
Logical Database Schema
एक Logical database schema यह प्रदर्शित करता है कि एक Database में Data कैसे Organize है यह Tables, Fields, और वे आपस में एक दूसरे के साथ कैसे संबंधित है इसके बारे में बताता है।
इस Schema में Tables जैसे Students या Coursedeatils जैसे चीजों को Represent करता है प्रत्येक Table के Fields(Columns) होते है जैसे Student Table के लिए ID, Name, DOB, Address आदि उसके Fields हो सकतें है।
Tables, Relationships को प्रदर्शित करने के लिए आपस मे जुड़े होते है जैसे कौन सा Student क्या Course कर रहा है।
Data Accuracy के लिए इसमें लागू किए गए नियम Constraints कहलाते हैं जैसे प्रत्येक Student का ID, Unique होना चाहिए तथा वह Null अर्थात Blank नही होना चाहिए ID में अवश्य ही प्रत्येक Student का ID, Enter किया जाना चाहिए।
यह Schema, Database के Design तथा उसके लिए Plan बनाने के लिए मदद करता है जो Data को समझना और उसे Manage करना आसान बनाता है।
यह इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि Data कैसे व्यवस्थित और संबंधित है न कि इस बात पर कि वह भौतिक रूप से कैसे संग्रहित है।
View Database Schema
एक Database में View level schema एक ऐसा layer है जो यह Define करता है कि Users, data को कैसे देखते और उसके साथ Interact करते हैं।
यह Database कि उसी भाग को प्रदर्शित करते हैं जिसे Users को देखने की जरूरत है न कि सभी भागों को इससे Users बड़े ही सरल और सुरक्षित तरीके से Data के साथ कार्य कर सकते है।
यह Schema एक Window के समान है जो Data को देखने और ढूंढने की अनुमति देता है और उन्हें यह समझने की जरूरत नहीं रहती की Database कैसे बना हैl
उदाहरण के लिए एक School का Database, Student के बारे में विस्तृत जानकारियां संग्रहित करता है लेकिन उस School के Clerk को केवल Student का नाम, Phone number ही देखने की जरूरत है।
अतः View level schema आपको जरूरत की सूचना दिखाता है तथा अनावश्यक सूचनाओं जैसे Students का Course या Grade details को छुपा देता है। Views का निर्माण SQL queries के द्वारा किया जाता है तथा उसे Virtual tables की तरह सुरक्षित किया जाता है।
ये विभिन्न Tables से Data को Combine या कुछ निश्चित Conditions के आधार पर Data को Filter कर सकते है। यह Schema संवेदनशील Data को सुरक्षित रखने में मदद करती है और Users के लिए उन्हें जो Data चाहिए उसे ढूंढना आसान बनाती है।
यह Schema Database का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह प्रत्येक User क्या देख सकता है और उसके साथ क्या काम कर सकता है उसे Control करता है।
Difference between Physical and Logical schema in Hindi
1) Logical schema:
यह दिखाता है कि Data कैसे संगठित और आपस में संबंधित है।
Physical schema:
यह दिखाता है कि Data कंप्यूटर पर कैसे संग्रहित है।
2) Logical schema:
यह Data के प्रकार और वे आपस में कैसे जुड़े हैं इस पर ध्यान केंद्रित करता है।
Physical schema:
यह Data को कैसे संग्रहित और प्राप्त किया जाए इस पर ध्यान केंद्रित करता है।
3) Logical schema:
यह Data और उसके Connection का वर्णन करता है।
Physical schema
यह Tables, Columns और Data कैसे सुरक्षित होता है इसका वर्णन करता है।
4) Logical schema:
Logical schema में बदलाव Storage method को प्रभावित नही करता है।
Physical schema:
Physical schema यह प्रभावित करता है कि Data कैसे और कहा Store होता है।
5) Logical schema:
Database के बनने के पहले Logical schema का निर्माण किया जाता है।
Physical schema:
Logical schema के बाद Physical schema का निमार्ण किया जाता है ।
6) Logical schema:
इसका उपयोग Designers और Developers द्वारा किया जाता है
Physical schema:
इसका उपयोग Administrators द्वारा किया जाता है जो Storage को manage करता है।
7) Logical schema:
इसमें किसी प्रकार का बदलाव, Physical storage को प्रभावित नही करता
Physical schema:
इसमें किया गया बदलाव Data कैसे Store तथा Access किया जाता है को प्रभावित करता है।
8) Logical schema:
यह उच्च स्तर पर संचालित होता है तथा Data Relationship को प्रदर्शित करता है।
Physical schema:
यह निम्न स्तर पर संचालित होता है तथा Storage details को प्रदर्शित करता है।
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